राष्ट्रीय निवेश कोष

सरकार ने नवंबर, 2005 में राष्ट्रीय निवेश कोष (एनआईएफ) का गठन किया था, जिसमें केन्द्रीय सरकारी क्षेत्र के उद्यमों के विनिवेश से प्राप्त धनराशि जमा करायी जानी थी। एनआईएफ का संग्रह स्थायी प्रकृति का रहना था और इसकी प्रबंध व्यवस्था पेशेवर तरीके से की जानी थी ताकि संग्रह को कम किए बिना सरकार को स्थायी आय प्राप्त हो सके। सरकारी क्षेत्र के चुनिंदा म्युचुअल फंडो नामतः यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी लि., एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट प्रा.लि. और एलआईसी म्युचुअल फंड एसेट मैनेजमेंट कंपनी लि. को एनआईएफ के संग्रह की प्रबंध व्यवस्था का काम सौंपा गया था। स्कीम के अनुसार एनआईएफ से होने वाली 75% आय का उपयोग सामाजिक क्षेत्र की चुनिंदा स्कीमों, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को बढ़ावा दें, का वित्त पोषण करने के लिए किया जाना था। एनआईएफ की शेष 25% आय का उपयोग लाभप्रद तथा पुनरूद्धार योग्य सरकारी क्षेत्र के उद्यमों में पूंजीनिवेश के लिए किया जाना था।.

वर्ष 2008-09 की कठिन आर्थिक स्थिति और 2009-10 के भीषण सूखे को ध्यान में रखते हुए सरकार ने (05 नवंबर, 2009 को) विनिवेश से प्राप्त राशि के उपयोग की नीति में परिवर्तन का अनुमोदन किया था, जिसमें विनिवेश से प्राप्त धनराशि का योजना आयोग/व्यय विभाग द्वारा निर्धारित सामाजिक क्षेत्र की चुनिंदा स्कीमों के लिए सीधे तौर पर उपयोग करने की एक बार की छूट प्रदान की गई थी। यह छूट अप्रैल, 2009 से मार्च, 2012 तक की अवधि के लिए लागू थी। अर्थव्यवस्था की लगातार कठिन स्थिति को ध्यान में रखते हुए विनिवेश से प्राप्त धनराशि को एनआईएफ में जमा कराने की छूट को आगे एक और वर्ष के लिए अर्थात अप्रैल, 2012 से मार्च, 2013 तक बढ़ाया गया था।

एनआईएफ को विनिवेश नीति के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से सरकार ने (17 जनवरी, 2013 को) निर्णय लिया कि वित्त वर्ष 2013-14 से विनिवेश से प्राप्त धनराशि मौजूदा एनआईएफ में जमा कराई जाएगी जो सरकारी लेखे के अधीन एक `लोक लेखा` है और यह राशि तब तक वहीं रहेगी जब तक इसे अनुमोदित उद्देश्यों के लिए निकाला/निवेशित न किया जाए। इसके साथ-साथ यह भी निर्णय लिया गया था कि एनआईएफ का उपयोग निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए किया जाएगा :-

(i)

सीपीएसईस द्वारा राइट्स बेसिस पर जारी किए जा रहे शेयरों का पूर्वक्रय करना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सीपीएसईस में सरकार के 51 प्रतिशत स्वामित्व में कोई कमी न आए।

(ii) सेबी (पूंजी का निर्गम तथा प्रकटीकरण अपेक्षाएं) विनियम, 2009 के अनुसार प्रवर्तकों को केन्द्रीय सरकारी क्षेत्र के उद्यमों के शेयरों का अधिमानी आबंटन ताकि उन सभी मामलों में, जहां केन्द्रीय सरकारी क्षेत्र का उद्यम अपने पूंजीगत व्यय कार्यक्रम को पूरा करने के लिए नई इक्विटी जुटाने का इच्छुक हो, वहां सरकारी शेयरधारिता 51 प्रतिशत से कम न होने पाए।
(iii)

सरकारी क्षेत्र के बैंकों तथा सरकारी क्षेत्र की बीमा कंपनियों का पुनः पूंजीकरण ताकि उन्हें बेसल III मापदंड़ों की प्राप्ति हेतु और पूंजी लगाकर मजबूती प्रदान की जा सके।

इसके अलावा, सरकार ने (21 फरवरी, 2013 को) निम्नलिखित उद्देश्यों को भी शामिल करने का अनुमोदन किया था, जिनका वित्त पोषण एनआईएफ से किया जाना है :-

(i) सरकार द्वारा आरआरबी/आईआईएफसीएल/नाबार्ड/एक्जिम बैंक में निवेश।
(ii) विभिन्न मेट्रो परियोजनाओं में इक्विटी लगाना।
(iii) भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लि0 और यूरेनियम कारपोरेशन इंडिया लि0 में निवेश।
(iv) भारतीय रेलवे में पूंजीगत व्यय के लिए निवेश।