कॉनकोर

 

वित्त वर्ष 2015-16 में सीपीएसई का सातवां विनिवेश आज संपन्न हुआ जिसमें कोन्कोर की ओएफएस (गैर-फुटकर बास्केट) शामिल थी जो 2 गुणा ओवरसब्सक्राइब हुई। 

पेशकश में कंपनी की 5% प्रदत्त इक्विटी शामिल थी जो 10 रुपये प्रति शेयर अंकित मूल्य के 97,48,710 शेयर बनते हैं। बिक्री के लिए प्रस्तावित शेयरों में से 20% शेयर खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित थे। 

सेबी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार 80% गैर-फुटकर हिस्से के लिए आज (टी दिन) केवल गैर-फुटकर निवेशकों को अपनी बोली प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई थी। पेशकश में कंपनी के 77,98,968 इक्विटी
शेयर शामिल थे, जिनकी कुल राशि न्यूनतम मूल्य पर 932 करोड़ रुपये बनती है। 

खुदरा निवेशक कल (टी+1) उनके लिए आरक्षित 20% हिस्से अर्थात कंपनी के 19,49,742 इक्विटी शेयरों के लिए बोली लगाएंगे जिनकी कुल राशि न्यूनतम मूल्य पर 233 करोड़ रुपयेबनती है। उनके पास मूल्य बोली लगाने या कटऑफ मूल्य पर बोली लगाने का विकल्प उपलब्ध होगा। नई व्यवस्था से खुदरा निवेशकों को टी दिन को कटऑफ मूल्य अन्वेषित होने और टी+1 दिन को अपनी बोलियां प्रस्तुत
करने की सुविधा मिलती है जो पूर्ववर्ती मामलों की तुलना में अधिक विज्ञात आधार बनता है। सामान्यतः खुदरा निवेशक अर्थात वे निवेशक जो कुल मिलाकर अधिकतम 2.00 लाख रुपये मूल्य के शेयरों के लिए बोली लगाते हैं, अतिरिक्त तौर पर 5% छूट के हकदार होंगे। छूट उन खुदरा निवेशकों के लिए लागू होगी जिनकी बोलियां कल (टी+1) प्राप्त होंगी। 

खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित शेयरों का अनसब्सक्राब्ड हिस्सा टी+1 दिन को गैर-खुदरा बोलीदाताओं के लिए निर्धारित किया जाएगा, जिसका मूल्य कटऑफ मूल्य के समान या बोलियों के
अनुसार अधिक होगा। इस बारे में ऐसे गैर-खुदरा बोलीदाताओं को अपनी बोलियां टी+1 दिन में आगे ले जाने की अपनी इच्छा दर्शाने का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। प्रभावी तौर पर ओएफएस के लिए बोली दो
दिनों के लिए खुली रहेगी।  

इस विनिवेश के बाद कोन्कोर में भारत सरकार की हिस्सेदारी घटकर 56.80% रह जाएगी। 

दिन के अंत में 1887.12 करोड़ रुपये की कुल सब्सक्रिप्शन के साथ निर्गम 2 गुणा ओवरसब्सक्राब हुआ।

 संकेतात्मक मूल्य 1196.20 रुपये था, जो न्यूनतम मूल्य से अधिक है। पिछले दिन (08.03.2016 को) अंतिम मूल्य 1226.65 रुपये (बीएसई)/1226.5 रुपये (एनएसई) था
और न्यूनतम मूल्य 1195 रुपये तय किया गया था।

निर्गम का मुख्य अंश एफआईआई की 373.41 करोड़ की प्रेरक भागीदारी रही, जो गैर- फुटकर बास्केट का 40% बनती है।