मारूति उद्योग लि. (एमयूएल)

मारुति उद्योग लिमिटेड

  1. सरकार ने, एक द्वि-चरणीय प्रक्रिया के माध्यम से मारुति उद्योग लिमिटेड में विनिवेश का अनुमोदन 14 मई, 2002 को प्रदान किया :

  • पहले चरण में, सरकार द्वारा अपने राइटस शेयरों का परित्याग सुजुकी के पक्ष में कर देने के साथ मारुति उद्योग लिमिटेड द्वारा 400 करोड़ रुपए का एक राइटस इश्यु। सुजुकी अधिकांश शेयरों पर अपना नियंत्रण प्राप्त कर लेगी और वह सरकार को नियंत्रण प्रीमियम के रूप में 1000 करोड़ रुपए का भुगतान करेगी ।
  • दूसरे चरण में सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से अपने मौजूदा शेयरों की बिक्री; यह इश्यु सुजुकी द्वारा खरीदा जाना है ।

सहमत करार के मुख्य अंश

  1. भारत सरकार और सुजुकी के वार्ताकार दलों के बीच सहमत करार के मुख्य अंशों का सारांश नीचे दिया गया है :

  • राइटस इश्यु का कुल मूल्य 400 करोड़ रुपए होगा।
  • राइटस इश्यु मूल्य 3280 रुपए प्रति शेयर होगा। इस प्रकार राइटस इश्यु प्रत्येक 100 रुपए के कुल 12,19,512 शेयरों के लिए होगा।
  • परित्याग प्रीमियम की गणना करने के प्रयोजन के लिए उचित मूल्य, इस प्रयोजन के लिए नियुक्त 3 सलाहकारों द्वारा किए गए परिकलन के अनुसार तीन मूल्यों का औसत अर्थात 3280 रुपए प्रति शेयर होगा।
  • भारत सरकार 6,06,585 शेयरों के अपने सभी राइटस शेयरों को छोड़ देगी और सुजुकी भारत सरकार द्वारा इस प्रकार परित्यक्त सभी राइटस शेयरों का उचित बाजार मूल्य पर पूर्व क्रय करेगी।
  • सुजुकी इस पद्धति और नीचे वर्णित पद्धतियों के माध्यम से मारुति उद्योग लिमिटेड के मूल्य में वृद्धि करेगी और सुजुकी भारत सरकार द्वारा मारुति उद्योग लिमिटेड में अपने शेयरों में से एक में भी कोई हिस्सेदारी किए बिना भारत सरकार को 1000 करोड़ रुपए के नियंत्रण प्रीमियम का भुगतान करेगी।
  • सुजुकी और भारत सरकार एक संशोधित संयुक्त उद्यम करार सम्पन्न करने के लिए सहमत हुए हैं। संशोधित संयुक्त उद्यम करार, भारत सरकार, सुजुकी और मारुति उद्योग लिमिटेड के बीच समस्त करार का संघटन बनेगा और ऐसे वाय वस्तु के संबंध में पार्टियों के बीच हुए कोई भी पूर्व समझौते तथा करार का अतिक्रमण हो जाएगा।
  • मारुति उद्योग लिमिटेड की संस्थागत अन्तर्नियमावली में ऊपर अभिलिखित निर्णयों के साथ उनको अनुकूल बनाने और मारुति उद्योग लिमिटेड के शेयरों का स्टॉक एक्सचेंज में सूचीकरण करने के लिए भी उपयुक्त संशोधन किए जाएंगे।
  • संशोधित संयुक्त उद्यम करार में यह व्यवस्था की गई है कि भारत सरकार, राइटस इश्यु के सौदे के पूरा हो जाने के बाद कानून द्वारा यथानुमत्य भारतीय और सार्वभौमिक निवेशकों की भागीदारी के साथ अपने मौजूदा शेयरों को घरेलू बाजार में बेच देगी।
  • सुजुकी, भारत सरकार द्वारा धारित अनुमानित 36 लाख शेयरों के पहले सार्वजनिक इश्यु को 2300 रुपए प्रति शेयर की दर पर खरीदने के लिए सहमत हुई है। शा शेयरों के लिए भारत सरकार के पास, 15 प्रतिशत की छूट पर और/अथवा औसत बाजार मूल्य के 10 प्रतिशत पर “विक्रय” विकल्प उपलब्ध है। भारत सरकार के पास इस समय के (2000 रुपए) अथवा उस समय के अंकित मूल्य पर, जो भी अधिक हो, 30 अप्रैल, 2004 तक सदा एक “विक्रय” विकल्प उपलब्ध है।
  1. चूंकि राइटस इश्यु का आकार 12,19, 512 शेयरों का होगा, इसलिए राइटस इश्यु के पूरा हो जाने के बाद सुजुकी और भारत सरकार की तुलनात्मक शेयरधारिता क्रमशः 54.20 प्रतिशत और 45.54 प्रतिशत होगी ।

  2. अब जो प्रतिशेयर मूल्य उभर कर आया है वह है 3684 रुपए जिसकी तुलना उस प्रतिशेयर मूल्य से की जानी चाहिए जो मूल्य तब आएगा यदि सुजुकी और भारत सरकार के बीच वर्ष 1992 के करार में सहमत सूत्र का उपयोग किया जाए। उस सूत्र का उपयोग करते हुए परिकलित प्रतिशेयर मूल्य 1153 रुपए होता है, जो अंतिम वर्ष अर्थात 2001-02 के अनंतिम आंकड़ों पर आधारित है।

गतिरोधों में उपलब्धि

  1. पहले के करार के कारण भारत सरकार की वार्ता संबंधी स्थिति निम्नलिखित गतिरोधों के कारण अत्यधिक अलाभकारी रही है। :

  • मौजूदा करार में यह खंड कि भारत सरकार को अपने हिस्से के हस्तांतरण के लिए सुजुकी की सहमति की आवश्यकता है।
  • वर्ष 1982 और 1992 में सुजुकी के साथ पहले के सौदे जब सुजुकी की शेयरधारिता (भारत सरकार की तुलना में) को बढ़ाकर 26 से 40% और फिर 40 से बढ़ाकर 50% करने की अनुमति दी गई थी, सुजुकी द्वारा कोई नियंत्रण प्रीमियम अदा नहीं किया गया था हालांकि नियंत्रण उनको सौंप दिया गया था। वास्तव में, उस चरण पर सरकार को कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ था। चूंकि एमयूएल को नए शेयर जारी करके शेयरधारिता को बढ़ाने की अनुमति दी गई थी। बाहर निकलने के विकल्प भी शामिल नहीं किए गए थे।
  • 1992 के मूल्य निर्धारण सूत्र के कारण भी प्रतिशेयर 259 रुपए का न्यून मूल्य प्राप्त हुआ था जिस पर सौदा किया गया था।
  • अब 1992 में उसी सूत्र का उपयोग करते हुए प्रतिशेयर मूल्य 1153 रुपए होगा, जैसाकि ऊपर उल्लेख किया गया है। इसके विरूद्ध वर्तमान सौदा 2300 रुपए की वचनबद्धता मानते हुए न्यूनतम 3684 रुपए पर होगा।
  • यदि हम अकेले राइट्स इश्यू का निरीक्षण करें, नए शेयरों का सुजुकी को अंतिम सौदे में 269 रुपए (समकक्ष मूल्य 1153 रुपए) की तुलना में 3280 रुपए पर आबंटित किए जा रहे हैं। पिछली बार 'शून्य' नियंत्रण प्रीमियम की तुलना में भी भारत सरकार को नियंत्रण प्रीमियम के रूप में 1000 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है।
  • कंपनी में पहले ही सुजुकी का 50% नियंत्रण है और भारत सरकार 49.74% पर अल्पांश स्थिति में है।
  • पिछले मनमानी मामले के कारण दोनों पक्षों के बीच अविश्वास के एक वातावरण पर 1997 के दौरान दोनों पक्षों के बीच लड़ाई चल रही है।
  1. आरंभ में सुजुकी ने नियंत्रण प्रीमियम के रूप में 170 करोड़ रुपए की पेशकश की थी, जिसे लंबी बातचीत के बाद बढा़कर 286 करोड़ रुपए कर दिया गया था। उसके बाद, वार्ताकार दल को एक महीने से भी अधिक समय लग गया जिससे राशि एक हजार करोड़ रुपए की गई, जिसकी मारूति ने अभी पेशकश की है।

  2. इसी प्रकार, आरंभ में सुजुकी भारत सरकार द्वारा शेयरों के सार्वजनिक निर्गम को खरीदने की प्रतिबद्धता को शामिल करने के लिए बिलकुल भी राजी नहीं थी। अब सुजुकी 36,12,169 मौजूदा शेयरों के सार्वजनिक निर्गम को 2300 रुपए प्रतिशेयर और शेष 29,68,012 शेयरों को न्यूनतम लगभग 2000 प्रतिशेयर के मौजूदा अंकित मूल्य पर खरीदने को तैयार हो गई है। एक बार एमयूएल सूचीबद्ध हो जाए और जब भारत सरकार सुजुकी के पूरे समर्थन के साथ सार्वजनिक निर्गम करे तो शेयरों का मूल्य अंकित मूल्य से अधिक होने की संभावना है। इसका मतलब है कि भारत सरकार को अधिक धनराशि प्राप्त होगी।

सौदे का विश्लेषण

  1. अब तक पूरे किए गए वी एस एन एल, बाल्को, एच जैड एल, सी एम सी आदि जैसे अन्य अनुकूल बिक्री के सौदों की तुलना में मारुति उद्योग लिमिटेड के विनिवेश की प्रकृति एकदम भिन्न है। अतः इस सौदे को, नीचे की गई चर्चा के अनुसार अलग-अलग पद्धतियों का उपयोग करते हुए समझना होगा।

  2. विनिवेश के अन्य मामलों के साथ तुलना; चूंकि मारुति उद्योग लिमिटेड एक सूचीबद्ध कम्पनी नहीं है, अतः दोनों पक्ष, तीन स्वतंत्र मूल्य निर्धारकों द्वारा किए गए मूल्य निर्धारण के माध्यम से मारुति उद्योग लिमिटेड के शेयरों का उचित मूल्य तय करने के लिए सहमत हुए थे। यह औसत मूल्य 3280 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से निकाला गया था। अतः इस उचित मूल्य के आधार पर सरकार के मौजूदा 6580181 शेयरों का मूल्य 2158 करोड़ रुपए निकाला गया। सरकार सुजुकी से इस समय जो कुछ प्राप्त कर रही है वह नियंत्रण प्रीमियम के रूप में 1000 करोड़ रुपए है और 36 लाख शेयरों के लिए 2300 रुपए प्रति शेयर तथा लगभग 29 लाख शेयरों के लिए 2000 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से लेने पर विचार करते हुए मौजूदा शेयरों के लिए यह 1424 करोड़ रुपए की एक अतिरिक्त धनराशि होगी। यदि मौजूदा शेयरों को वर्तमान अंकित मूल्य से अधिक में बेचा जा सकता हो तो भारत सरकार की प्राप्तियां और भी अधिक हो जाएंगी। इस प्रकार, भारत सरकार को इस सौदे में से नियंत्रण की सुपुर्दगी और मौजूदा शेयरों को बेचकर न्यूनतम 2,424 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे जो ऊपर उल्लेख किए गए 2,158 करोड़ रुपए के उचित मूल्य से 266 करोड़ रुपए अधिक हैं। यदि हम पहले के सौदों के इसी प्रकार के आंकड़ों के साथ तुलना करें तो यह पाया जाएगा कि वर्तमान सौदा उन सौदों से कहीं बेहतर है जो उनमें संभव होते।

  3. मारुति उद्योग लिमिटेड में सुजुकी के पास 50 प्रतिशत शेयर पहले से ही हैं और नियंत्रण एवं प्रबंधन अधिकार पहले के करारों के अनुसार बराबर से अधिक थे। यह उनके प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ता होने के कारण था। विनिवेश के अन्य मामलों में भारत सरकार के शेयरों को अर्जित करने से पूर्व अनुकूल साझीदार के पास कोई नियंत्रण नहीं रहता अपितु वह अनुकूल बिक्री के बाद ही नियंत्रण का अधिकार प्राप्त करता है। इस प्रकार, सुजुकी द्वारा इस समय की गई नियंत्रण प्रीमियम की पेशकश को इसी पृठभूमि में देखा जाना चाहिए।

  4. सरकार को नकद वार्षिक आमदनी: इस समय सरकार अपनी शेयरधारिता पर लाभांश प्राप्त करती है। विगत कई र्वों में सरकार को प्राप्त लाभांश लगभग 13-20 करोड़ रुपए प्रति वर्ष रहा है। वर्ष 2000-01 में मारुति उद्योग लिमिटेड ने किसी लाभांश की घाणा नहीं की । यदि यह सौदा पूरा हो जाता है तो सरकार को 1000 करोड़ रुपए पहले ही प्राप्त हो जाएंगे जिस पर 10 प्रतिशत की सन्तुलित दर पर 100 करोड़ रुपए प्रति वार्षिक का ब्याज प्राप्त होगा। इसके साथ ही मौजूदा शेयरों पर लाभांश भी मिलेगा, भले ही सरकार इन शेयरों को न बेचे। यदि सरकार इन शेयरों को बेच देती है तब भारत सरकार को, ऊपर बताए गए अनुसार 1424 करोड़ रुपए की प्राप्ति पर (10 प्रतिशत की दर पर) कम से कम 142 करोड़ रुपए प्रति वर्ष प्राप्त होंगे। इस प्रकार, सरकार को 13-20 करोड़ रुपए प्रति र्वा के मौजूदा लाभांश स्तर की तुलना में 242 करोड़ रुपए की न्यूनतम वार्षिक आमदनी होगी।

  5. सुजुकी द्वारा मूल्य में अभिवृद्धि: संशोधित संयुक्त उद्यम करार में सुजुकी ने निम्नलिखित वचनबद्धता शामिल की है :

  • सुजुकी, इसके कुछ सार्वभौमिक मॉडलों के लिए मारुति उद्योग लिमिटेड को स्रोत बनाने का प्रयास करेगी।
  • सुजुकी, नए निर्यात बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए मारुति उद्योग लिमिटेड की सहायता करेगी।
  • सुजुकी, इसके द्वारा पहले की सहमति के अनुसार कतिपय पूर्जों पर छूट प्रदान करेगी।
  • सुजुकी, मारुति उद्योग लिमिटेड में लागत को और कम करने की सम्भावनाओं का पता लगाने के लिए एक कार्य बल का गठन करेगी।
  • सुजुकी, सार्वभौमिक बाजार में मारुति उद्योग लिमिटेड तथा इसके उत्पादों का संवर्धन करेगी।
  • सुजुकी, मारुति उद्योग लिमिटेड की विनिर्माण और तकनीकी क्षमताओं को उद्यमशीलता के साथ सुदृढ़ करेगी ताकि मारुति उद्योग लिमिटेड के उत्पादों को गुणवत्ता और लागत के सन्दर्भ में अन्तर्राट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्द्धात्मक बनाया जा सके।

यदि भारत सरकार द्वारा पीछे हट जाने के परिणामस्वरूप सुजुकी द्वारा उपर्युक्त गतिविधियां हाथ में ले ली जाती हैं तो न केवल सुजुकी अपितु भारत में भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र भी लाभान्वित होगा। मारुति उद्योग लिमिटेड इस समय राट्रीय राजका में हर र्वा लगभग 2500 करोड़ रुपए का योगदान करती है। मारुति उद्योग लिमिटेड के उच्चतर विकास और लाभार्जन के परिणामस्वरूप भी, मारुति उद्योग लिमिटेड से कर के माध्यम से भारत सरकार को अधिक प्राप्तियां होंगी। इसके अलावा, सुजुकी के सभी उपर्युक्त उपाय मारुति उद्योग लिमिटेड के मूल्य में वृद्धि करेंगे और अतः ऊपर आंकलित न्यूनतम प्राप्तियों से कहीं अधिक प्राप्तियों की सम्भावना सुनिश्चित करेंगे।

  1. मूल्य गुणक अनुपात का विश्लेषण: इस सौदे को समझने का एक अन्य तरीका यह हो सकता है कि इस मामले में अर्जित लाभ को पहले के विनिवेशों से अर्जित लाभ के साथ परखा जाए। पहले के मामलों में अर्जित लाभ 37 (एच टी एल), 63 (आई बी पी), 11 (वी एस एन एल), 19 (बाल्को), 12 (सी एम सी) और 26 (एच जैड एल) रहा है। यदि हम उपर्युक्त विवेचित सन्तुलित परिदृश्य को लें तो सरकार 49.74 प्रतिशत धारिता के लिए 2424 करोड़ रुपए प्राप्त करती है जिसका अर्थ यह हुआ कि कुल मिलाकर मारुति उद्योग लिमिटेड के लिए 4873 करोड़ रुपए का इक्विटी मूल्य। 2001-2002 में मारुति उद्योग लिमिटेड द्वारा अर्जित लाभ 55 करोड़ रुपए था। यह लगभग 89 का लाभार्जन अनुपात देता है जिसकी पहले के विनिवेश के लाभार्जन के साथ अच्छी प्रकार तुलना की जा सकती है।

  2. तुलनीय कम्पनियां: ऊपर विवेचित सन्तुलित परिदृश्य को लेते हुए, प्रति शेयर मूल्य लगभग 3684 रुपए बैठता है जो 1.8 के अंकित मूल्य अनुपात का मूल्य होने के परिणामस्वरूप लगभग 2000 रुपए प्रति शेयर के मौजूदा अंकित मूल्य से कहीं अधिक है। यह तीन मूल्य निर्धारकों द्वारा किए गए मूल्य निर्धारण से भी अधिक है। यह इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कुछ कम्पनियां इस समय अपने अंकित मूल्य से भी कम मूल्य पर व्यवसाय कर रही हैं ।

बातचीत की पृठभूमि

  1. भारत की एक प्रमुख कार विनिर्माता, मारुति उद्योग लिमिटेड भारत सरकार और सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन (सुजुकी) का एक संयुक्त उद्यम है। 31 मार्च, 2001 को समाप्त हुए र्वा की स्थिति के अनुसार मारुति उद्योग लिमिटेड के पास 132.30 करोड़ की इक्विटी पूंजी और 2642 करोड़ रुपए की निवल धन सम्पत्ति थी। भारी प्रतिस्पर्द्धा के कारण मारुति के लाभार्जन पर भारी दबाव पड़ा है।

  2. मौजूदा संयुक्त उद्यम करार के अनुसार, मारुति उद्योग लिमिटेड के प्रबंधन पर भारत सरकार और सुजुकी, दोनों का संयुक्त नियंत्रण था और कम्पनी के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक की नियुक्ति बारी-बारी से की जाती थी। इसके अतिरिक्त, संयुक्त उद्यम करार, सुजुकी की सहमति के बिना मारुति उद्योग लिमिटेड के शेयर किसी तीसरे पक्ष को बेचने से भारत सरकार को प्रतिबंधित करता था।

  3. सरकार ने एक परित्याग विकल्प के साथ मारुति उद्योग लिमिटेड के मौजूदा शेयरधारकों को राइटस आधार पर शेयरों की पेशकश करने के विकल्प के माध्यम से मारुति उद्योग लिमिटेड में विनिवेश करने का निर्णय फरवरी, 2001 में लिया था। सरकार ने, सरकार की ओर से सुजुकी के साथ बातचीत करने के लिए एक वार्ताकार दल का गठन किया था। इस दल में, विनिवेश मंत्रालय के सचिव, भारी उद्योग विभाग के सचिव और आई सी आई सी आई के प्रबंध-निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री के.वी. कामथ सम्मिलित थे। समिति को सुजुकी के साथ बातचीत करने और विनिवेश की रुपात्मकताओं को अन्तिम रूप देने के लिए कहा गया था।

सुजुकी के साथ बैठकें

  1. भारत सरकार और सुजुकी के वार्ताकार दल के बीच बैठकों का पहला दौर नई दिल्ली में 02 मार्च, 2001 और 12 मार्च, 2001 के बीच आयोजित किया गया था। विचार-विमर्श के समापन पर, चर्चाओं की एक टिप्पणी पर दोनों पक्षों द्वारा 13 मार्च, 2001 को हस्ताक्षर किए गए। सारांश के रूप में, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए थे कि मारुति उद्योग लिमिटेड में भारत सरकार के शेयरों के विनिवेश की रूप रेखा दो चरणों में सम्पन्न होगी - प्रथम चरण में राइटस इश्यु और राइटस इश्यु के पूरा हो जाने के बाद, दूसरे चरण में भारत सरकार के मौजूदा शेयरों की बाजार में बिक्री। यह स्वीकार किया गया था कि यह रूप रेखा मारुति उद्योग लिमिटेड के विस्तार और विकास के लिए इसमें अपेक्षित पूंजी लाने में सहायक होगी और साथ ही साथ मारुति उद्योग लिमिटेड के मूल्य में वृद्धि करने और पारदर्शी तरीके से इसके शेयर मूल्य की प्राप्ति में मार्गदर्शन करेगी जिससे आगे के विनिवेश के लिए मानक तय करने में सहायता मिलेगी।

  2. सहमत राइटस इश्यु का मूल्य 400 करोड़ रुपए था जो मुख्य रूप से मारुति उद्योग लिमिटेड में पूंजी विस्तार की आवश्यकताओं के आधार पर निकाला गया था ।

  3. मारुति के शेयरों के मूल्य निर्धारण के संबंध में यह सहमति हुई थी कि शेयरों का मूल्य तय करने के लिए भारत सरकार और सुजुकी संयुक्त रूप से तीन प्रतिठित मूल्य निर्धारकों को अभिज्ञात करेंगे और उन्हें नियुक्त करेंगे और वे तीनों मूल्यों के औसत को स्वीकार करेंगे।

  4. के पी एम जी, अर्नेस्ट एण्ड यंग और एस बी बिलिमोरिया को मूल्य निर्धारकों के रूप में नियुक्त किया गया था और उन्होंने अपनी मूल्य निर्धारण रिपोर्टें जनवरी, 2002 में प्रस्तुत की, जिनकी प्रतिलिपियां सुजुकी को भी उपलब्ध करवा दी गयी थी। तीनों मूल्य निर्धारकों द्वारा अनुशंसित प्रति शेयर उचित मूल्य केपीएमजी द्वारा 3200 रुपए, अर्नेस्ट एण्ड यंग द्वारा 3142.18 रुपए और एसबी बिलमोरिया द्वारा 3500 रुपए था। तीन अलग-अलग मूल्य निर्धारकों द्वारा किए गए मूल्य निर्धारण का औसत 3280 रुपए निकलता है ।

  5. मूल्य निर्धारण रिपोर्ट की प्राप्ति के बाद, राइटस, इश्यु किस मूल्य पर किया जाएगा, भारत सरकार के राइटस इश्यु का वह भाग जो सुजुकी द्वारा अभिदत्त किया जाना है और परित्याग प्रीमियम तथा नियंत्रण प्रीमियम और भारत सरकार द्वारा धारित मौजूदा शेयरों की बिक्री की रुपात्मकताओं आदि पर सहमति बनाने के लिए भारत सरकार और सुजुकी के वार्ताकार दल के बीच बैठकों का दूसरा दौर 12 फरवरी, 2002 और 29 अप्रैल, 2002 के बीच नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। संशोधित संयुक्त उद्यम करार को अन्तिम रूप देने के लिए भी विचार-विमर्श किया गया था। विचार-विमर्श के समापन पर विचार-विमर्श की एक टिप्पणी पर दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे ।

  6. कोटक महेन्द्रा केपिटल कम्पनी लिमिटेड ने भारत सरकार के सलाहकार के रूप में कार्य किया। दुआ एण्ड एसोसिएटस सरकार के विधिक सलाहकार थे ।

    "सितंबर, 2005 में सरकार ने (भारत सरकार की 18.28% धारिता में से) 8% धारिता का भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विनिवेश करने का निर्णय लिया। सरकार ने 8% इक्विटी (2,31,12,804 शेयर) 1567.60 करोड़ रुपए के मूल्य पर बेची थी। प्रतिशेयर भारित औसत 678.24 रुपए थी।"

    31 दिसंबर, 2006 को आर्थिक कार्य संबंधी मत्रिमंडल समिति ने मारूति उद्योग लि. में सरकार के स्वामित्व वाले 10.27% अवशिष्ट इक्विटी का सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों, भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय म्युचुअल फंडों को विनिवेश करने का अनुमोदन किया था। 39 संस्थानों/बैंकों/म्युचुअल फंडों से अभिरूचि की अभिव्यक्तियां 09 मार्च, 2007 को प्राप्त हुई थी। उपरोक्त 39 इच्छुक पार्टियों में से 36 संस्थानों/बैंकों/म्युचुअल फंडों ने वित्तीय बोलियां 08 मई, 2007 को प्रस्तुत की। अंतरीय नीलामी पद्धति के आधार पर 32 संस्थानों/बैंकों/म्युचुअल फंडों को शेयर आबंटित किए गए थे। मारूति उद्योग लि. में 10.27% भागीदारी की बिक्री से सरकार 794.49 रुपए प्रतिशेयर की भारित औसत पर कुल 2366.94 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे।

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