एनबीसीसी

 

वित्त वर्ष 2016-17 में सीपीएसई का छठा विनिवेश 20 और 21 अक्तूबर, 2016 को संपन्न हुआ जिसमें एनबीसीसी की ओएफएस शामिल थी जो गैर-फुटकर श्रेणी में 1.54 गुणा और फुटकर श्रेणी में 1.50 गुणा ओवरसब्सक्राइब हुई। 

पेशकश में कंपनी की 15% प्रदत्त इक्विटी शामिल थी जो 2 रुपये प्रति शेयर अंकित मूल्य के 9,00,00,000 शेयर बनते हैं। बिक्री के लिए प्रस्तावित शेयरों में से 20% शेयर खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित थे। दिनांक 19 अक्तूबर, 2016 को अंतिम मूल्य 253.00 रुपये (बीएसई)/253.30 रुपये (एनएसई) था और न्यूनतम मूल्य 246.50 रुपये तय किया गया था। 

सेबी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार गैर-फुटकर हिस्से के लिए दिनांक 20 अक्तूबर, 2016 (टी दिन) को केवल गैर-फुटकर निवेशकों को अपनी बोली प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई थी
और दिनांक 21 अक्तूबर, 2016 (टी+1 दिन) को खुदरा निवेशकों को बोली लगाने की अनुमति दी गई थी। 

खुदरा निवेशकों में आज (टी+1) उनके लिए आरक्षित 20% हिस्से अर्थात कंपनी के 1,80,00,000 इक्विटी शेयरों के लिए बोली लगाई जिसकी कुल राशि न्यूनतम मूल्य पर 443.70 करोड़
रुपये
बनती है। उनके पास मूल्य बोली लगाने या कटऑफ मूल्य पर बोली लगाने का विकल्प उपलब्ध था। नई व्यवस्था से खुदरा निवेशकों को टी दिन को कटऑफ मूल्य अन्वेषित होने और टी+1 दिन को अपनी
बोलियां प्रस्तुत करने की सुविधा मिलती है जो पूर्ववर्ती मामलों की तुलना में अधिक विज्ञात आधार बनता है। सामान्यतः खुदरा निवेशक अर्थात वे निवेशक जो कुल मिलाकर अधिकतम 2 लाख रुपये मूल्य के शेयरों के
लिए बोली लगाते हैं, अतिरिक्त तौर पर 5% छूट के हकदार होंगे। छूट उन खुदरा निवेशकों के लिए लागू होगी जिनकी बोलियां आज (टी+1) प्राप्त हुई हैं। 

इस विनिवेश के बाद एनबीसीसी में भारत सरकार की हिस्सेदारी घटकर 75% रह जाएगी।

दिन के अंत में 2,218 करोड़ रुपये (न्यूनतम मूल्य पर) की तुलना में 3098 करोड़ रुपये की कुल सब्सक्रिप्शन के साथ एनबीसीसी की ओएफएस 1.4 गुणा ओवरसब्सक्राब हुई। 

निर्गम का मुख्य अंश एफआईआई की 369.21 करोड़ की प्रेरक भागीदारी रही, जो गैर- फुटकर बास्केट का 21% बनती है।